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Samajik utthan

 ''अपना आकलन स्वयं न करना'' ----------------------- ज्ञानवान को भी अपने गुण का, ज्ञान ,दूसरों से होता है | वे स्वयं अपने गुणों को जान नहीं सकते | नयन अपने गौरव का अनुभव तब तक नहीं कर सकते | जब तक सामने दर्पण नहीं होता है  | हरिओम सिंह बघेल ग्वालियर