Samajik utthan
''अपना आकलन स्वयं न करना''
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ज्ञानवान को भी अपने गुण का, ज्ञान ,दूसरों से होता है |
वे स्वयं अपने गुणों को जान नहीं सकते |
नयन अपने गौरव का अनुभव तब तक नहीं कर सकते |
जब तक सामने दर्पण नहीं होता है |
हरिओम सिंह बघेल ग्वालियर
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ज्ञानवान को भी अपने गुण का, ज्ञान ,दूसरों से होता है |
वे स्वयं अपने गुणों को जान नहीं सकते |
नयन अपने गौरव का अनुभव तब तक नहीं कर सकते |
जब तक सामने दर्पण नहीं होता है |
हरिओम सिंह बघेल ग्वालियर
Jay maa
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